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मंगलवार, 13 फ़रवरी 2018

#कन्या के जन्म लेने पर शगुन में फीस न्योछावर।


कानपुर की डॉ. नीरा दीक्षित और के.के. डोकानिया की अनूठी मुहिम।

कानपुर:- बेटियों के लिए सम्मान कायम करने के लिए शहर के एक अस्पताल में अनूठी मुहिम जारी है। यहां बेटी के जन्म पर माता-पिता से कोई फीस नहीं वसूली जाती है। इसके साथ ही कई अन्य सुविधाएं मुफ्त में मुहैया होती हैं। दवा और नर्सिंग खर्च भी किफायती मूल्य पर उपलब्ध कराए जाते हैं। अस्पताल से विदाई के वक्त जच्चा और बच्चा को तोहफा भी दिया जाता है। इस मुहिम के खेवनहार हैं डॉ. के.के. डोकानिया और डॉ. नीरा दीक्षित।


गरीबों के लिए दीदी जैसी हैं डॉ. नीरा दीक्षित

कल्याणपुर इलाके में स्थित निजी अस्पताल में गाइनोलॉजिस्ट नीरा दीक्षित पहचान की मोहताज नहीं हैं। आसपास के ग्रामीण इलाकों में डॉक्टर दीदी के नाम से विख्यात डॉ. नीरा बेहद मुश्किल हालात में सिजेरियन डेलीवरी का सहारा लेती हैं। बेटियों की कोख में हत्या रोकने के लिए पिछले एक महीने से अस्पताल में नायाब मुहिम का श्रीगणेश किया गया है। अस्पताल के प्रबंधक और बालरोग विशेषज्ञ डॉ. के.के. डोकानिया तथा उनकी सहयोगी डॉ. नीरा दीक्षित ने तय किया है कि बेटी के जन्म पर प्रसूता से तमाम किस्म के खर्च नहीं वसूले जाएंगे। डॉ. नीरा दीक्षित ने अपनी फीस को बतौर शगुन न्योछावर करने का फैसला लिया है।

विदाई के समय संदेश के साथ तोहफा

बेटियों के लिए सम्मान की भावना विकसित करने के नजरिए से डॉ. डोकानिया ने बेटी के जन्म देने वाली प्रत्येक प्रसूता को अस्पताल से विदाई के समय बेटियों की हिफाजत और उन्हें काबिल बनाने के प्रेरक संदेशों के साथ नायाब तोहफा भी देते हैं। अस्पताल प्रबंधन ने बेटी को जन्म देने पर ऑपरेशन थियेटर की फीस माफ करने के साथ-साथ प्रसूता को एयरकंडीशन वार्ड में रखने का इंतजाम किया है। अस्पताल में एंटीनेटल चेकअप कराने के लिए आने वाली महिलाओं की काउंसिलिंग भी मुफ्त में होती है।


प्रसव के बाद भी बेटी का रखते हैं ध्यान

बेटियों के लिए संवेदनशील अस्पताल में जन्म के बाद भी बेटियों का ख्याल रखा जाता है। नवजात बच्ची के टीकाकरण में नाममात्र का शुल्क लेने के साथ ही मुफ्त में हेल्थ कार्ड भी बनाया जाता है। प्रसूता बीपीएल या अन्त्योदय कार्डधारी है तो छूट की सीमा और बढ़ जाती है। इस बारे में अस्पताल संचालक डॉ. के.के. डोकानिया कहते हैं कि बेटियों के लिए तमाम लोग अपने-अपने अंदाज में समाज में काम करते हैं। ऐसे में हम लोगों ने भी योगदान देने के लिए एक अभियान छेड़ा है। इस मुहिम के बारे में डॉ. नीरा दीक्षित का कहना है कि उनके पिता ने अच्छी सोच के दम पर चार बहनों को काबिल बनाया। पापा की सोच को आगे बढ़ाने के लिए ऐसे अभियानों से लोगों को खुद आगे बढक़र जुडऩा चाहिए।

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