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सोमवार, 16 जुलाई 2018

हनुमान जी की 8 भयंकर शक्तिया #Public Statement


अष्टसिद्धि नव निधि के दाता
अस बर दीन जानकी माता 

गोस्वामी तुलसीदास द्वारा लिखी गई श्री हनुमान चालीसा की इस चौपाई को तो आपने पढ़ी ही होगी. इस चौपाई में तुलसीदास बताते हैं कि हनुमान आठ सिद्धियों से संपन्न है पर क्या आपको पता है कि हनुमान की वे कौन-कौन सी आठ सिद्धियां हैं, जिनका जिक्र तुलसीदास ने किया है. आइए जानते हैं उन आठ अपार शक्तियों के बारे में.
पहली सिद्धि है अनिमा. ये सिद्धि हनुमान के पास थी. इससे वह अपने शरीर को इतना छोटा कर सकते थे की छोटे से छोटा अणु या कोई पार्टीकल भी उनके समक्ष पहाड़ की तरह दिखे. आपको पता होगा की जब हनुमान माता सीता को मिलने गए थे तब उन्होंने अपने शरीर के आकार को चींटी की भांति छोटा किया था.

दूसरी सिद्धि है महिमा. इस सिद्धि का उपयोग कर हनुमान अपने शरीर का आकार मन चाहे उतना विशाल बना सकते थे. उनके समक्ष पहाड़ क्या, पृथ्वी क्या, पूरा ब्रम्हांड भी सूक्ष्म दिखने लगेगा. आपको ज्ञात होगा जब संजीवनी बूटी लानी थी तब हनुमान जी ने विशाल स्वरूप धारण कर पहाड़ को भी अपनी बाजुओं पर उठा लिया था.

तीसरी सिद्धि है लघिमा. इस सिद्धि का उपयोग कर हनुमान जी अपने शरीर का वजन ना के बराबर कर सकते थे. उन पर ना गुरुत्वाकर्षण का प्रभाव हो सकता था और ना कोई केंद्रीय उर्जा उन्हें खीच सकती थी. इसके कारण हनुमान प्रकाश की गति से भी ज्यादा तेज उड़ सकते थे. और इसी शक्ति का उपयोग कर हनुमान जी सूरज निगलने के लिए प्रकाश की गति से दोड़े थे.

चौथी सिद्धि है गरिमा. इस सिद्धि से हनुमान अपने शरीर का वजन इतना बढ़ा सकते थे कि उन पर किसी भी शक्ति का कोई प्रभाव नहीं हो सकता था. उनको उठाने की तो छोड़ो उनके बाल को भी हजारो हाथ मिलकर हीला तक नहीं सकते थे. आपको भीम और हनुमान का वो प्रसंग तो मालूम ही होगा. हजारों हाथी का बल धारण करने वाला भीम हनुमान जी की पूंछ को हिला तक नहीं पाए थे.

पांचमी सिद्धि है प्राप्ति. अगर आपके पास यह सिद्धि हो तो आप मनचाही चीज को पा सकते हैं. आप को कोई रोक नहीं सकता. हनुमान जी के पास यह सिद्धि थी और वह मनचाही चीज को पा सकते थे उन्हें कोई रोक नहीं सकता था. जैसे बचपन में उन्होंने सूरज को निगल लिया था. परंतु सृष्टि के कल्याण हेतु उन्हें सूरज को छोड़ना पड़ा था.

छठी सिद्धि है प्राकाम्य. ये सिद्धि है कामनाओं को पूरा करने की और लक्ष्य को सहज पाने की सिद्धि. हनुमान जी के पास यह सिद्धि थी और इसके कारण वो किसी भी लक्ष्य को आसानी से पा सकते थे.

सातमी है वशित्व सिद्धि. इस सिद्धि से हनुमानजी किसी को भी वश में कर सकते कहते हैं. कहते हे ये सिद्धि रावण के पास भी थी. उसी से रावण ने नव ग्रहों को छल से अपने वश में किया था, लेकिन हनुमान जी ने रावण के वश का प्रभाव खत्म कर सारे ग्रहों को उसकी दुष्ट शक्ति से मुक्त किया था

और आठमी की सिद्धि है ईशित्व. ये सिद्धि सिर्फ देवताओं के पास ही हो सकती है. इस सिद्धि के होने की वजह से हनुमान जी को ईश्वर के समान स्वरूप प्राप्त होता था इसलिए वह किसी भी भक्त की इच्छापूर्ति कर सकते हैं

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