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शनिवार, 7 अप्रैल 2018

प्राइवेट स्कूल मस्त.माता पिता पस्त.



प्राइवेट स्कूल मस्त.माता पिता पस्त

कानपुर। :-जिस देश की सरकार
शिक्षा को बढ़ावा देने की बात करते नहीं थकती उसी सरकार में आज भी कुछ ऐसे तानाशाह स्कूल है जिन्हें अपनी जेब भरने के शिवा किसी की तकलीफ नजर नहीं आती। ऐसा ही एक  मामला कानपुर के एक प्रतिष्ठित  प्राईवेट स्कूल का है जहां स्कूल के प्राचार्य से लेकर चपरासी तक अपनी मनमर्जी से चलते है यह ज्यादातर तब होता है जब आप किसी स्कूल से परेशान होकर अपने बच्चे का नाम किसी अन्य स्कूल में नाम लिखवाने की बात कहते हैं।
ऐसा ही एक ताजा मामला सिविल लाईन स्थित विशॉप  वेस्टकाट स्कूल का है। जहां एक पत्रकार भाई अपने भतीजे की टी.सी. लेने स्कूल के लिये स्कूल के कार्यालय पहुंचे जहां उन्होंने एक टी.सी फार्म के साथ टी सी की लिखित प्रार्थना पत्र तथा साथ में बच्चे के रिजल्ट की मांग के लिये खिड़की से अन्दर बैठे बाबू को दिया। बाबू जी टी सी अप्लीकेशन देख कर बड़ी जोर झुल्ला कर जोर से अप्लीकेशन अपनी तरफ खींची और पत्रकार भाई के पूछनें पर चिल्लाकर बोले की 10-12 दिन में जब बन जायेगी तब आपको बता दिया जायेगा। पत्रकार भाई ने अपना परिचय देते हुये कहा कि सर कृपया अप्लीकेशन की फोटोकापी पर रिसीविंग दे दो तो झूल्लाये बाबू ने ली हुई अप्लीकेशन व टीसी फार्म खिड़की से बाहर फेक दिया और कहने लगे जाओ डी एम साहब को ले आओ मैं न फार्म लूंगा न रिसीविंग दूंगा। पत्रकार भाई सूझबूझ दिखाते हूये बिना बहेस किये सीधा प्रधानाचार्या के आफिस पहूंचे जहां एक बाबू और मिले और उन्हें पूरी बात बतायी गयी उसके बाद वही हुआ जो पहले हुआ था। एक ही थाली के चट्टे बट्टे उन् साहब ने  भी कहा की आपकी अप्लीकेशन हमारी जिम्मेंदारी में रहेगी पर मैं रिसीविंग नहीं दूंगा। पत्रकार के विनम्रता पूर्वक यह पूछे जाने पर कि यदि आप अप्लीकेशन ले रहे है तो उसकी एक कापी रिसीव करके दे दो तो इस बात पर वह भी भड़क गये और यह कह कर  आफिस के अन्दर चले गये कि जितने बड़े पत्रकार हो जो कर पाओ कर लो हम ना ही टीसी देंगे न रिसीविंग देंगे और गेट बंद कर लिया। ऐसा रवैया तो अनपढ़ ही कर सकता है पर मुझे लगता है  इन्हें पढ़ालिखा गंवार कहना गलत नहीं होगा।  कहने को तो ये वो अध्यापक है जो बच्चों को ज्ञान देने का कार्य करते है पर इनकी ऐसी भाषा शैली से तो यही लगता है की अभी इनको और ज्ञान अर्जित करने की आवश्यकता है। योगी व मोदी से यही अपील है की जल्द ही इन स्कूलों पर कोई शख्त कदम उठाये वरना वो दिन दूर नहीं जब लोग स्कूलों को व्यापारिक स्थल का नाम देंगे ।

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