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शुक्रवार, 6 अप्रैल 2018

ट्रांसपोर्ट नगर चौकी के फइम खान की करतूत आई सामने

06/04/2018
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रिपोर्ट:-दिग्विजय सिंह
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रोडवेज़ यातायात आधीक्षक को बचाने के लिये कानून का कर रहे दुरुपयोग

कानपुर:-वाह रे कानूनी दांवपेंच जिस पुलिस पर सच्चाई को उजागर कर भ्रष्ट अधिकारियों को सजा दिलाने का दारोमदार होता है आज वही पुलिस का एक सिपाही चन्द्र भ्रष्ट रोडवेज़ के अधिकारियों को बचाने के लिये स्वमं भ्रष्ट बन गया । झूठे आरोप लगाकर सच्चाई को उजागर करने वाले एक संवादाता पर उल्टा केस बना दिया। संवादाता मोहित पांडेय ने रोडवेज़ में हो रही धान्दली को प्रमुखता से उजागर किया । एक दिन जब मोहित पांडेय अपने कैमरा मैंन शरद यादव के साथ रोडवेज़ अधिकारी से मिलने उनके कक्ष में गये तो उनके बगल वाली सीट पर यातायात अधीक्षक सुरेश चंद शंखवार पहले से ही  विराजमान थे खैर जब मोहित ने अधिकारी से रोडवेज़ की समस्याओ  का बखान किया तो शंखवार जी ने अपना आपा खो दिया और लगे पत्रकार को हड़काने बोले तू है कौन तुझे रोडवेज परिसर में घुसने नहीं दूंगा उन्होंने अमर्यादित तरीके से पत्रकारों से हाथापाई की और जब पत्रकार ने इसका वीडियो बनाने के लिये कैमरा निकाला तो शंखवार साहब ने कैमरे में हाथ मारते हुए कैमरा छीनने की कोशिश की इस आपाधापी में कैमरा जमीन पर गिर कर क्षतिग्रस्त हो गया। इस बीच कुछ और लोग कमरे में आ गये हालांकि ये स्पष्ट नहीं हो पाया की वो लोग कौन थे । और दरवाजा बंद कर लिया दरवाजा बंद करते ही बाकी लोगों ने भी दोनों पत्रकारों से मारपीट करने की कोशिश की हो हल्ला सुन जब वहां यात्रियों की भीड़ इकठ्ठा होने लगी तो बाहर खड़े अन्य व्यक्ति ने अधिकारियों को बताया भीड़ इकठ्ठा हो रही है। तब अपना गला फंसता देख अधिकारियों ने तुरंत ही दरवाजा खुलवाया। जब पत्रकार मोहित पांडेय ने इसकी सूचना अपने सम्पादक और अन्य पत्रकारों को दी तो वहां कई पत्रकार एकत्रित हो गये और अपने साथी पत्रकार के साथ हुई घटना के बारे में उन दोनों अधिकारियों से जानना चाहा तब भी अधिकारियों ने अपना नाम तक नहीं बताया और एक बुजुर्ग अधिकारी  ने अपने मोबाइल से अन्य आये हुए पत्रकारों का वीडियो बनाने लगे । उस पर जब पत्रकारों ने वहां के सी सी टी वी कैमरों के बारे में पूछा तो सारे कैमरे बंद मिले वरना उसी दिन दूध का दूध पानी का पानी हो जाता। तदुपरांत मोहित पांडेय ने इस पूरे घटनाक्रम की ऑन लाइन शिकायत की जिसकी जांच के लिये ट्रांसपोर्ट नगर चौकी के एक महानुभाव फइम खान साहब को सौंपी गई फइम खान साहब ने पूरी निष्ठा से बगैर जांच किये बगैर मोहित पांडेय से उनका पक्ष जाने न्याय करते हुए मोहित पांडेय को धारा 107/116पर मुकदमा कायम कर दिया। जबकि मोहित पांडेय ने रोडवेज़ में हो रही धांधली के पूरे सबूत फइम खान साहब को मोबाइल द्वारा उपलब्ध कराये अब ये समझ से परे है की फइम साहब ने ऐसा क्यों किया अब इसकी भी जांच होनी चाहिये क्योंकि अब फइम साहब खुद शक के दायरे में आ गये है उन्हें यातायात अधीक्षक की बात तो सत्य लगी पर देश का चौथा स्तम्भ कहे जाने वाला पत्रकार उन्हें झूठा लगा।

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