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सोमवार, 9 जुलाई 2018

मुन्ना बजरंगी क्या था और कैसे उतरा जरायम की दुनया में #Public Statement


मुन्ना बजरंगी का असली नाम प्रेम प्रकाश सिंह है उसका जन्म 1967 में उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के पूरेदयाल गांव में हुआ था उसके पिता पारसनाथ सिंह उसे पढ़ा लिखाकर अपसर बनाने का सपना देख रहे  थे लेकिन ऐसा हो न सका प्रेम प्रकाश उर्फ मुन्ना बजरंगी ने उनके अरमानों को कुचल दिया  उसने पांचवीं कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़ दी और 17 साल की उम्र तक आते आते उसे कई ऐसे शौक लग गए जो उसे जुर्म की दुनिया में ले जाने के लिए काफी थे

मुन्ना को बचपन से ही हथियार रखने का बड़ा शौक था वह फिल्मों की तरह एक बड़ा गैंगेस्टर बनना चाहता था. यही वजह थी कि 17 साल की नाबालिग उम्र में ही उसके खिलाफ पुलिस ने पहला मुकदमा दर्ज किया था जौनपुर के सुरेही थाना में उसके खिलाफ मारपीट और अवैध असलहा रखने का मामला दर्ज किया गया था इसके बाद मुन्ना ने कभी पलटकर नहीं देखा वह जरायम के दलदल में धंसता चला गया और वापस कभी बाहर नहीं निकल पाया 

*1984 में की थी एक व्यापारी की थी पहली हत्या*

मुन्ना बजरंगी  अपराध की दुनिया में लगातार  अपनी पहचान बनाने की कोशिश में लगा था इसी दौरान उसे जौनपुर के स्थानीय दबंग माफिया गजराज सिंह का संरक्षण हासिल हो गया मुन्ना अब उसके लिए काम करने लगा था इसी दौरान 1984 में मुन्ना ने लूट के लिए एक व्यापारी की हत्या कर दी उसके मुंह खून लग चुका था इसके बाद उसने गजराज के इशारे पर ही जौनपुर के भाजपा नेता रामचंद्र सिंह की हत्या करके पूर्वांचल में अपना दम दिखाया उसके बाद उसने कई लोगों की हत्या करी 

*अपना दबदबा बढ़ाने के लिये  गजराज सिंह को छोड़ दूसरे गैंग में शामिल हो गया*

पूर्वांचल में अपनी साख बढ़ाने के लिए मुन्ना बजरंगी 90 के दशक में पूर्वांचल के बाहुबली माफिया और राजनेता मुख्तार अंसारी के गैंग में शामिल हो गया. यह गैंग मऊ से संचालित हो रहा था, लेकिन इसका असर पूरे पूर्वांचल पर था. मुख्तार अंसारी ने अपराध की दुनिया से राजनीति में कदम रखा और 1996 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर मऊ से विधायक निर्वाचित हुए. इसके बाद इस गैंग की ताकत बहुत बढ़ गई. मुन्ना सीधे पर सरकारी ठेकों को प्रभावित करने लगा था. वह लगातार मुख्तार अंसारी के निर्देशन में काम कर रहा था.

*ठेकेदारी और रंगदारी ने बढ़ाई  दुश्मनी*

पूर्वांचल में सरकारी ठेकों और वसूली के कारोबार पर मुख्तार अंसारी का कब्जा था लेकिन इसी दौरान तेजी से उभरते बीजेपी के विधायक कृष्णानंद राय उनके लिए चुनौती बनने लगे उन पर मुख्तार के दुश्मन ब्रिजेश सिंह का हाथ था उसी के संरक्षण में कृष्णानंद राय का गैंग फल फूल रहा था इसी वजह से दोनों गैंग अपनी ताकत बढ़ा रहे थे इनके तार  अंडरवर्ल्ड के साथ भी जुड़े गए थे कृष्णानंद राय का बढ़ता प्रभाव मुख्तार को रास नहीं आ रहा था उन्होंने कृष्णानंद राय को खत्म करने की जिम्मेदारी मुन्ना बजरंगी को सौंप दी मुन्ना बजरंगी ने भाजपा विधायक कृष्णानंद राय को खत्म करने की साजिश रची. और उसी के चलते 29 नवंबर 2005 को  मुन्ना बजरंगी ने कृष्णानंद राय को दिन दहाड़े मौत की नींद सुला दिया. उसने अपने साथियों के साथ मिलकर लखनऊ हाइवे पर कृष्णानंद राय की दो गाड़ियों पर AK47 से 400 गोलियां बरसाई थी. इस हमले में गाजीपुर से विधायक कृष्णानंद राय के अलावा उनके साथ चल रहे 6 अन्य लोग भी मारे गए थे. पोस्टमार्टम के दौरान हर मृतक के शरीर से 60 से 100 तक गोलियां बरामद हुईं थी. इस हत्याकांड ने सूबे के सियासी हलकों में हलचल मचा दी. हर कोई मुन्ना बजरंगी के नाम से खौफ खाने लगा. इस हत्या को अंजाम देने के बाद वह मोस्ट वॉन्टेड बन गया था.


*सात लाख का इनामी था मुन्ना*

भाजपा विधायक की हत्या के अलावा कई मामलों में उत्तर प्रदेश पुलिस, एसटीएफ और सीबीआई को मुन्ना बजरंगी की तलाश थी इसलिए उस पर सात लाख रुपये का इनाम भी घोषित किया गया उस पर हत्या, अपहरण और वसूली के कई मामलों में शामिल होने के आरोप है. वो लगातार अपनी लोकेशन बदलता रहा पुलिस का दबाव भी बढ़ता जा रहा था

*अंडरवर्ल्ड के सहारे मुंबई में ली थी पनाह*

यूपी पुलिस और एसटीएफ लगातार मुन्ना बजरंगी को तलाश कर रही थी उसका यूपी और बिहार में रह पाना मुश्किल हो गया था दिल्ली भी उसके लिए सुरक्षित नहीं था इसलिए मुन्ना भागकर मुंबई चला गया उसने एक लंबा अरसा वहीं गुजारा इस दौरान उसका कई बार विदेश जाना भी होता रहा उसके अंडरवर्ल्ड के लोगों से रिश्ते भी मजबूत होते जा रहे थे और मुन्ना बजरंगी  मुंबई से ही फोन पर अपने लोगों को दिशा निर्देश दे रहा था और वही से गैंग संचालित करने लगा 

*नाटकीय ढंग से गिरफ्तार हुआ था मुन्ना*

उत्तर प्रदेश समते कई राज्यों में मुन्ना बजरंगी के खिलाफ मुकदमे दर्ज थे वह पुलिस के लिए परेशानी का सबब बन चुका था. उसके खिलाफ सबसे ज्यादा मामले उत्तर प्रदेश में दर्ज हैं. लेकिन 29 अक्टूबर 2009 को दिल्ली पुलिस ने मुन्ना को मुंबई के मलाड इलाके में नाटकीय ढंग से गिरफ्तार कर लिया था. माना जाता है कि मुन्ना को अपने एनकाउंटर का डर सता रहा था. इसलिए उसने खुद एक योजना के तहत दिल्ली पुलिस से अपनी गिरफ्तारी कराई थी. मुन्ना की गिरफ्तारी के इस ऑपरेशन में मुंबई पुलिस को भी ऐन वक्त पर शामिल किया गया था बाद में दिल्ली पुलिस ने कहा था कि दिल्ली के विवादास्पद एनकाउंटर स्पेशलिस्ट राजबीर सिंह की हत्या में मुन्ना बजरंगी का हाथ होने का शक है इसलिए उसे गिरफ्तार किया गया तब से उसे अलग अलग जेल में रखा जा रहा है. इस दौरान उसके जेल से लोगों को धमकाने, वसूली करने जैसे मामले भी सामने आते रहे हैं मुन्ना बजरंगी का दावा है कि उसने अपने 20 साल के आपराधिक जीवन में 40 हत्याएं की हैं

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