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शुक्रवार, 2 फ़रवरी 2018

#वित्तमंत्री ने दी सौगात, 400 सीबी-नॉट मशीन के जरिए होगा टीबी का इलाज।



कानपुर:- शहर के करीब 13 हजार आठ सौ टीबी रोगियों के लिए गुरूवार को दिन काफी राहत भरा रहा। जहां वित्तमंत्री ने रोगियों को हर माह पांच सौ रूपए देने का ऐलान किया, वहीं मल्टी ड्रग रेजिस्टेंस (एमडीआर) टीबी से सीधे मुकाबले की तैयारी है, इसके लिए दो 400 सीबी-नॉट (कार्टिरेज बेस्ड न्यूक्लिक एसिड एम्फ्लिकेशन टेस्ट) मशीने कानपुर आ गई हैं। जिला क्षयरोग अधिकारी डॉक्टर जीके मिश्रा ने बताया कि एक मशीन बिधनू के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में तो दूसरी जीएसवीएम मेडिकल कालेज के मुरारी लाल चेस्ट हास्पिटल में लगाई जाएगी।



प्रत्येक मरीज के बलगम की सीबी नॉट मशीन से कल्चर कराई जाएगी। उसके बाद सटीक और पूरा इलाज होगा। इसके अलावा यूपी के 40 जिलों में 66 मशीने लगेंगी। डॉक्टर मिश्रा ने बताया कि बजट में मरीजों के लिए पैसे की व्यवस्था वित्तमंत्री ने की है। सभी टीबी मरीजों को इस योजना का लाभ मिलेगा। इसके लिए उन्हें अपना आधार कार्ड डॉट्स सेंटर और जिला क्षयरोग कार्यालय सिविल लाइंस में जमा कराना होगा।

दो मशीने पहुंची कानपुर, निशुल्क जांच

देश को टीबी मुक्त बनाने के लिए केंद्र सरकार युद्ध स्तर पर जुटी हुई है। इसी के तहत वित्तमंत्री अरूण जेटली ने बटज में इन रोगियों के लिए पैसे की व्यवस्था की है। शहर के 13 हजार आठ सौ टीबी रोगियों को हर माह पांच रूपए वेतन दिया जाएगा। इसके अलावा केंद्र सरकार पुनरीक्षित राष्ट्रीय क्षयरोग नियंत्रण कार्यक्रम (आरएनसीटीपी) को प्रभावी बना रही है। इसके तहत आरएनसीटीपी ने लेटेस्ट तकनीक की 400 सीबी-नॉट (कार्टिरेज बेस्ड न्यूक्लिक एसिड एम्फ्लिकेशन टेस्ट) मशीनें खरीदी गई हैं। इन्हें देशभर के उन क्षेत्रों में लगाया जाना है, जहां टीबी के सर्वाधिक केस रिपोर्ट होते हैं। इसमें सूबे के 40 जिलों के 66 सरकारी अस्पतालों एवं टर्सरी सेंटरों में मशीन लगाई जाएगी। जिला क्षयरोग अधिकारी ने बताया कि दो मशीनें जिले को मिली हैं, जिनकी कीमत 40 लाख रूपए है। उसमें एक बिधनू एवं दूसरी एमएल चेस्ट में लगेगी। बिधनू में मशीन आ गई है। उसे स्थापित करने का कार्य चल रहा है। एमएल चेस्ट में रेनोवेशन कार्य चलने से विलंब हो रहा है। अगले सप्ताह तक वहां भी मशीन लग जाएगी।

इसके जरिए सटीक इलाज

जिला क्षयरोग अधिकारी डॉक्टर जीके मिश्रा ने बताया कि सरकारी अस्पतालों में आने वाले टीबी के हर संदिग्ध मरीज की सघन स्क्रीनिंग होगी। उनके बलगम की कल्चर जांच सीबी नॉट मशीन पर होगी। इससे यह पता किया जाएगा कि मरीज को सामान्य टीबी या एमडीआर टीबी का संक्रमण है। मरीज की स्थिति जानने के बाद सटीक इलाज मुहैया कराया जाएगा। इसमें चूक की गुंजाइश नहीं होगी। डॉक्टर जीके मिश्रा के मुताबिक सीबी नॉट मशीन की खासियत है कि मरीज के शरीर में टीबी के बैक्टीरिया (जीवाणु) की मात्रा बहुत कम होने पर भी टीबी का पता चल जाएगा। इसमें मरीज के बलगम की कल्चर जांच की जाती है। तीन घटे में रिपोर्ट मिल जाती है। इस मशीन को सीधे कंप्यूटर से जोड़ा जाएगा। उसके बाद मरीज, डॉक्टर व सेंटर को सीधे ईमेल से भी रिपोर्ट भेजी जा सकेगी। डॉक्टर मिश्रा ने बताया कि कानपुर में पिछले 2016 के मुकाबले 2017 में टीबी के रोगियों की संख्या में कमी आई है।

छतरपुर से रेफर होकर कानपुर आ रहे मरीज

डॉक्टर मिश्रा ने बताया कि एमपी के छतरपुर शहर और नौगांव से बड़ी संख्या में टीबी के रोगी वहां के अस्पताल से रेफर होकर आ रहे हैं।बताया कि दिसंबर 2017 में नौगांव में चल रहे प्राईवेट हॉस्पिटल से पांच दर्जन से ज्यदा मरीज मुरालीलाल आए। उनके पर्च देखे गए तो गलत इलाज पाया गया। कुछ ऐसे मरीज मिले, जिन्हें टीबी नहीं थी, बावजूद दवा खा रहे थे। डॉक्टर मिश्रा के मुताबिक बांदा, हमीरपुर, छतरपुर, महोबा, जालौन जिलों में टीबी के मरीजों की संख्या बहुत अधिक है। डॉक्टर मिश्रा कहते हैं कि मरीज को सरकारी अस्पताल में जाकर अपना इलाज करवाना चाहिए। अगर मरीज नियमिज दवा ले तो यह मर्ज जड़ से खत्म हो सकता है। कुछ लोग शर्म के चलते अपने रोग को छिपाए रखते हैं जो गलत है।

आधार और बैंक खाता करवाएं लिंक

जिला क्षयरोग अधिकारी ने बताया कि टीबी रोगियों को बजट में बड़ी सौगात मिली है। इसमें एमडीआर टीवी रोगी भी लाभ पाएंगे। सभी टीबी रोगियों को डाट्स सेंटर और क्षयरोग कार्यालय सिविल लाइंस में आधार और बैंक खाता लिंक कराना होगा। मरीजों के खाते में सीधे पैसा पहुंचेगा। पर निजी और सरकारी डॉक्टरों को टीबी रोगी का नोटीफिकेशन करना होगा। टीबी मरीजों के पैसे के अलावा दवा निशुःल्क दी जाएगी। वहीं निजी अस्पतालों में इलाज करवा रहे मरीजों को भी इसका लाभ मिलेगा।उन्हें अपने डॉक्टर से पूरा ब्योरा डॉट्स सेंटर भेजना होगा।

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